कंज़ अल-ईमान (कुरान अनुवाद) खज़ैन अल-इरफ़ान (कुरान फ़ुटनोट्स) डाउनलोड करें
**’कंज़ुल ईमान’** (ईमान का खज़ाना) 14वीं सदी हिजरी के महान विद्वान, शोधकर्ता और मुजद्दिद, **इमाम अहमद रज़ा खान ‘आला हज़रत’** की एक अद्वितीय और ऐतिहासिक कृति है। सन् 1910 में मुकम्मल हुआ यह उर्दू अनुवाद न केवल अपनी भाषाई शुद्धता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह कुरान के संदेशों को उसकी रूह (आत्मा) के साथ पेश करने का एक बेमिसाल उदाहरण है। दुनिया भर के इस्लामी विद्वानों ने इसे कुरान का सबसे सटीक और विश्वसनीय अनुवाद माना है, क्योंकि यह केवल शब्दों का शाब्दिक रूपांतरण नहीं है, बल्कि यह पवित्र ग्रंथ के वास्तविक अर्थों और आस्था की रक्षा करने वाला एक मार्गदर्शक है।
इस अनुवाद की सबसे बड़ी विशेषता **’अदब’** (सम्मान और मर्यादा) है। आला हज़रत ने अनुवाद करते समय अल्लाह की महानता और नबियों की गरिमा का विशेष ध्यान रखा है। अक्सर शाब्दिक अनुवादों में ऐसी भाषा का प्रयोग हो जाता है जिससे अनजाने में अल्लाह या उसके पैग़म्बरों की शान में कमी का आभास होने लगता है, लेकिन कंज़ुल ईमान में ऐसे शब्दों का चयन किया गया है जो अल्लाह की पवित्रता और नबियों की निष्पाप छवि को सुरक्षित रखते हैं। यही कारण है कि इसे एक ‘ईमानी तर्जुमा’ कहा जाता है, जो पढ़ने वाले के दिल में अल्लाह और उसके रसूल के प्रति प्रेम और श्रद्धा को और गहरा कर देता है।
आज के समय में, जब हिंदी भाषी समाज में कुरान के सही और प्रामाणिक संदेश को समझने की आवश्यकता बढ़ रही है, **कंज़ुल ईमान का हिंदी अनुवाद** एक क्रांतिकारी उपहार है। यह हिंदी पाठकों को आला हज़रत के उस महान ज्ञान और आध्यात्मिक विरासत से सीधे जोड़ता है जो अब तक मुख्य रूप से उर्दू तक सीमित थी। इस हिंदी प्रस्तुति का उद्देश्य आम जनमानस तक कुरान का वह शुद्ध संदेश पहुँचाना है जो न केवल अकादमिक रूप से सही है बल्कि रूहानियत से भरपूर भी है। यह अनुवाद सरल हिंदी और प्रामाणिक इस्लामी शब्दावली का एक ऐसा संगम है जो आधुनिक पाठकों के लिए समझने में आसान और विश्वास में अटूट है।
खज़ाइन-उल-इरफ़ान फ़ी तफ़सीर-उल-कुरान, कंज़-उल-ईमान पर एक कमेंट्री है। कंज़-उल-ईमान कुरान का एक ट्रांसलेशन है जिसे आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खान फ़ाज़िल बरेलवी ने लिखा है। इसे मौलाना नईमुद्दीन मुरादाबादी (अल्लाह उन पर रहम करे) ने बड़ी ज्ञान और समझ के साथ लिखा है। यह कमेंट्री पवित्र कुरान की मुश्किल जगहों, आयतों के ज़ाहिर होने की शान और बेसिक एक्सपेगेटिकल पॉइंट्स को बहुत आसान और साफ़ तरीके से समझाती है, ताकि आम पढ़ने वाला भी कुरान का मतलब सही ढंग से समझ सके। खज़ाइन-उल-इरफ़ान का स्टाइल न तो बहुत छोटा है और न ही बेवजह लंबा, बल्कि यह एक बैलेंस्ड और समझने लायक एक्सपेगेटिकल कमेंट्री है। आज भी, खज़ाइन-उल-इरफ़ान को कंज़-उल-ईमान के साथ ऑनलाइन और प्रिंट दोनों में सबसे ज़्यादा पढ़ी जाने वाली छोटी कमेंट्री में से एक माना जाता है।



